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सिर्फ माइक पकड़ने से पत्रकार नहीं बनते: अपने चैनल को एक असली 'मीडिया हाउस' जैसी पहचान कैसे दें?

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सिर्फ माइक पकड़ने से पत्रकार नहीं बनते: अपने चैनल को एक असली 'मीडिया हाउस' जैसी पहचान कैसे दें?
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    आजकल हर दूसरे हाथ में माइक और कैमरा है। सोशल मीडिया पर हज़ारों न्यूज़ चैनल चल रहे हैं। लेकिन भीड़ में आपकी पहचान कैसे अलग होगी? प्रशासन, पुलिस और जनता आपके रिपोर्टर को गंभीरता से क्यों लेगी?

    जवाब है—प्रोफेशनल आइडेंटिटी (Professional Identity)

    अक्सर देखा गया है कि जब यूट्यूबर या वेब पोर्टल के पत्रकार फील्ड में कवरेज के लिए जाते हैं, तो अधिकारी उनसे वैलिड ID कार्ड या अथॉरिटी लेटर मांगते हैं। अगर उस वक़्त आपके रिपोर्टर के पास गले में लटका हुआ एक साधारण सा प्रिंटेड कार्ड है, तो उस पर शक किया जाता है।

    लेकिन अगर वही रिपोर्टर एक ऐसा कार्ड दिखाए जिस पर स्कैन करने योग्य QR कोड हो और जो ऑनलाइन वेरीफाई होता हो, तो सामने वाले का नज़रिया तुरंत बदल जाता है।

    समस्या: पुराना तरीका अब खतरनाक है

    पहले लोग फोटोशॉप में कार्ड डिज़ाइन करते थे और प्रिंट करवा लेते थे। लेकिन आज के दौर में 'फर्जी पत्रकारों' की बढ़ती संख्या को देखते हुए, प्रशासन अब मैनुअल कार्ड्स को मान्यता नहीं देता। उन्हें चाहिए 'डिजिटल वेरिफिकेशन'।

    यहीं पर हमारा MediaID SaaS Portal आपके काम आता है।

    समाधान: अपने चैनल को टेक्नोलॉजी से अपग्रेड करें

    हमारा पोर्टल आपके न्यूज़ चैनल को एक कॉर्पोरेट सिस्टम देता है। यह सिर्फ एक सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि आपकी इज्ज़त और सुरक्षा का कवच है।

    1. पुलिस वेरिफिकेशन में 100% कारगर हमारे सिस्टम से बने हर ID कार्ड के पीछे एक स्मार्ट QR कोड होता है। जब भी पुलिस या सिक्योरिटी गार्ड इसे स्कैन करता है, तो उसे स्क्रीन पर "Verified" का स्टेटस दिखता है। यह साबित करता है कि कार्ड असली है और रिपोर्टर आपके चैनल का ऑथोराइज्ड मेंबर है।

    2. एक बार में पूरा दफ्तर मैनेज करें आपको रिपोर्टर्स का बायोडाटा फाइलों में रखने की जरूरत नहीं है। आपका पूरा डेटा क्लाउड पर सुरक्षित रहता है। आप दुनिया के किसी भी कोने से देख सकते हैं कि आपके कितने रिपोर्टर एक्टिव हैं और कितनों का कार्ड एक्सपायर हो रहा है।

    3. ब्रांडिंग जो असर छोड़े (6-in-1 Kit) सोचिये, जब आपका रिपोर्टर किसी अधिकारी के पास जाए और उन्हें एक प्रोफेशनल विजिटिंग कार्ड दे, गाड़ी पर आपका ऑफिशियल स्टीकर लगा हो और हाथ में डिजिटल मुहर वाला अथॉरिटी लेटर हो। यह सब हमारा सिस्टम एक क्लिक में बना कर देता है। आपको अलग-अलग डिज़ाइन बनवाने के पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे।

    4. रिपोर्टर की भर्ती (Hiring) हुई आसान अब आपको रिपोर्टर्स के पीछे भागने की जरूरत नहीं। बस अपना 'जॉइनिंग लिंक' सोशल मीडिया पर डाल दें। जो भी इच्छुक पत्रकार होगा, वह खुद फॉर्म भरेगा, डॉक्यूमेंट अपलोड करेगा और फीस (अगर आप लेते हैं) जमा करेगा। आपको बस फाइनल मुहर (Approve) लगानी है।

    निष्कर्ष

    पत्रकारिता में 'विश्वास' ही सबकुछ है। अगर आप अपने चैनल को लेकर गंभीर हैं, तो आज ही मैनुअल काम बंद करें और ऑटोमेशन अपनाएं। अपने चैनल को वह प्रोफेशनल लुक दें जिसका वह हकदार है।

    याद रखें, जो दिखता है, वही बिकता है!

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    P
    PRESS ID Team

    PRESSID में कंटेंट रणनीतिकार


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